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बैतूल के कलाकारों ने जयपुर में लहराया कोरकू संस्कृति का परचम, गडली-सुसुन नृत्य से किया मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व, कोरकू संस्कृति ने जीता सबका दिल

बैतूल:- जवाहर कला केंद्र जयपुर में आयोजित 28वें लोकरंग महोत्सव में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व बैतूल जिले के लोक कलाकारों ने गडली-सुसुन नृत्य के माध्यम से किया। यह राष्ट्रीय लोकनृत्य समारोह 7 से 17 अक्टूबर तक चला, जिसमें देश के 8 राज्यों गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, लक्षद्वीप और तमिलनाडु की लोक संस्कृतियां साकार हुईं। मध्यप्रदेश की ओर से कोरकू संस्कृति के प्रसिद्ध गडली नृत्य की प्रस्तुति दल प्रमुख एच. जी. एस. प्रदेश संस्कृति रीति रिवाज प्रमुख महादेव बारस्कर के नेतृत्व में दी गई।

  1. मंत्रमुग्ध हो उठा पूरा सभागार
    टीम का संचालन और निर्देशन “ हमसे मिलना है तो होशंगाबाद आना ” गीत के प्रसिद्ध गायक सिंगर अर्जुन धोटे एवं डायरेक्टर परमेश बारस्कर के मार्गदर्शन में हुआ। कलाकारों ने नौवें और दसवें दिन मध्यवर्ती मंच पर कोरकू संस्कृति के पारंपरिक गडली नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर पूरे मध्यप्रदेश और कोरकू समुदाय को गौरवान्वित किया। ढोलक, बांसुरी और थापटी की लय पर जब पुरुषों ने सुसुन और महिलाओं ने गडली नृत्य किया, तो पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो उठा।
  2. पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के प्रमुख शासन सचिव रहे मुख्य अतिथि
    कार्यक्रम में कला, साहित्य, संस्कृति, पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के प्रमुख शासन सचिव राजेश यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति दर्ज की। उनके साथ केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक प्रियंका राठौड़, विशिष्ट अतिथि हेमंत कुमार गेरा (आई.ए.एस. चेयरमैन रूडा – ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण) सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कलाकार और कला प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर जवाहर कला केंद्र जयपुर द्वारा सभी कलाकारों को राष्ट्रीय प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
  3. गडली-सुसुन नृत्य कोरकू समुदाय की मूल पहचान
    गडली-सुसुन नृत्य कोरकू समुदाय की मूल पहचान है। यह एक मांगलिक नृत्य है, जिसमें पुरुषों द्वारा किए जाने वाले नृत्य को सुसुन और महिलाओं द्वारा किए जाने वाले नृत्य को गडली कहा जाता है। कोरकू समुदाय में नृत्य सदैव सामूहिक रूप में ही किया जाता है। यह परंपरा पूरे वर्ष धार्मिक अनुष्ठानों, दशहरा, दिवाली और शिवरात्रि जैसे पर्वों पर निभाई जाती है। पुरुष ढोलक और बांसुरी की थाप पर नृत्य करते हैं, जबकि महिलाएं चिटकोरी नामक वाद्य यंत्र बजाती हैं, जिसमें घुंघरू लगे होते हैं।
  4. बैतूल जिले के कलाकारों ने किया उत्कृष्ट प्रदर्शन
    लोकरंग महोत्सव के समापन पर कला, साहित्य, संस्कृति, पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के प्रमुख शासन सचिव राजेश यादव ने लोकरंग का झंडा उतारकर 11 दिवसीय राष्ट्रीय लोकनृत्य समारोह और राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का विधिवत समापन किया। इस अवसर ने भारत की विविध सांस्कृतिक छवि को साकार करते हुए लोककला, नृत्य और संगीत की सुनहरी यादें छोड़ीं, वहीं बैतूल जिले के कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से मध्यप्रदेश और कोरकू समाज का नाम गौरवान्वित किया।
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